मैं एक बार अपने दोस्त के साथ पालमपुर गया और पालमपुर जाने में मेरे को बहुत समय लगा रात को हम बस में बैठकर चंडीगढ़ से पालमपुर गए और मैंने देखा कि धीरे- बस हमारी आगे बढ़ते गई तो वह कुछ ज्यादा ही मिलनी शुरू हो गई पर बाहर बहुत अंधेरा था मैं बस के बाहर देख नहीं पा रहा था कि यह क्या हो रहा है बस धीरे आगे बढ़ती गई और धीरे सारी रात भर चलती गई और बहुत जोर जोर से जंप करते हुए हम उसकी

पिछली सीट के ऊपर बैठे हुए थे बहुत ऊपर उछल रहे थे कि बस जैसे ही किसी गड्ढे में लगती तो हम एकदम पूछे जाते तो ऐसे कर हम ने यह सफर पूरा किया और सुबह जब हम बस से उतरे तो हम ने देखा कि बाहर निकल कर पालमपुर काम बस स्टैंड आ चुका था हमने देखा कि बाहर बहुत बड़े पहाड़ हैं जिन पहाड़ों के ऊपर बर्फ लगी हुई थी और वह देखकर हम यह सोचने लगे कि यह पहाड़ इतने ऊंचे कैसे हैं और हम भी काफी ऊंचाई पर आ चुके थे पर मेरे मन में जाओ था कि हम उन पहाड़ों के ऊपर जाए तो तभी हमारा मित्र एक जो पालमपुर में रहता था वह हमें अपनी गाड़ी से लेने के लिए आ गया और वह हमें एक होटल के अंदर लेकर गया और होटल का हमने कमरा लिया और वहां पर जाकर हमने उस दिन तो रेस्ट की और उसके अगले दिन हम पहाड़ों को देखने के लिए वहां से पैदल चल पड़े कुछ दूर के बाद हमने एक नहीं बस पकड़ी और उन पहाड़ों के ऊपर जाना शुरु कर दिया और यह देखकर हम सोचने लगे कि यह पहाड़ इतने ऊपर कैसे हैं और हमने कुछ आगे बढ़े तो बस हमें जहां पर बुध लोगों का एक मंदिर था वहां पर ले गई और हमने वहां से देखा कि यह पहाड़ तो खत्म नहीं होते और हमने बहुत सारी पिक्चर क्लिक की और देखा कि यह पहाड़ इतने बड़े कैसे हैं पर कुछ देर बाद हम वहां से शाम को वहां से चल पड़े हमको पता चला कि जहां से लास्ट बस 7:00 बजे मिलती है और यह सोचकर हम वहां पर कुछ समय गुजारते रहे और हमने वहां पर सबसे ऊपर पहाड़ के ऊपर गए वहां पर जाकर हमने एक बुद्ध मंदिर देखा वहां पर हमने बुध मंदिर के बाहर चाय वाले सेनिक चाय पी और यह देखकर हम बहुत खुश हो रहे थे कितना ऊंचे पहाड़ यह कैसे बने हैं दोस्तों इस के वाक्य के साथ मैं आपको कुछ अपनी पिक्चर भी सेंड कर रहा हूं और आप कमेंट बॉक्स में मेरे को बताएं कि कि आपको यह वाक्य कैसे लगा बाकी मैं अपनी स्टोरी आपको अगले दिन बताऊंगा
